विस्तृत उत्तर
पूजा घर में एक से अधिक गणेश मूर्ति रखने के विषय में शास्त्रीय ग्रंथों में कोई स्पष्ट निषेध नहीं है, परंतु लोक परंपरा और कुछ पंडितों की मान्यता में कुछ नियम बताए गए हैं।
प्रचलित मान्यता
- 1एक गणेश मूर्ति उत्तम — अधिकांश परंपराओं में पूजा घर में एक गणेश मूर्ति रखना ही उत्तम माना जाता है। यह मान्यता है कि दो गणेश मूर्तियां रखने से 'विघ्न संतोषी' दोष होता है — अर्थात विघ्न बने रहते हैं।
- 1लोक मान्यता का आधार — यह विश्वास है कि गणेश विघ्नहर्ता हैं और एक ही विघ्नहर्ता पर्याप्त हैं। दो रखने से वे एक-दूसरे की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं — ऐसी लोक मान्यता है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण
- 1कोई स्पष्ट निषेध नहीं — शिल्प शास्त्र या किसी प्रमुख पुराण में दो गणेश मूर्तियों पर प्रत्यक्ष निषेध का प्रमाण नहीं मिलता।
- 1भिन्न रूप — यदि दो मूर्तियां गणेश जी के भिन्न रूपों की हैं (जैसे सिद्धि विनायक और वक्रतुंड), तो कुछ परंपराओं में इसे स्वीकार्य माना जाता है।
- 1मंदिरों में — अनेक मंदिरों में गणेश जी की एक से अधिक मूर्तियां स्थापित हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि यह सार्वभौमिक निषेध नहीं है।
व्यावहारिक सुझाव
- 1यदि संदेह हो तो एक ही गणेश मूर्ति रखें।
- 2यदि पुरानी और नई दोनों मूर्तियां हैं, तो पुरानी मूर्ति का विधिवत विसर्जन करके नई स्थापित करें।
- 3गणेश चतुर्थी पर लाई गई मूर्ति अनंत चतुर्दशी पर विसर्जित करें; उसे स्थायी रूप से पूजा घर में न रखें।
- 4टूटी या खंडित गणेश मूर्ति पूजा घर में कदापि न रखें — इसका विसर्जन करें।
स्पष्टीकरण: यह मान्यता मुख्यतः लोक परंपरा पर आधारित है। शास्त्रीय प्रमाण सीमित है। अपने कुल पंडित या गुरु से परामर्श लेना उत्तम है।





