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व्रत📜 गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, व्रत परम्परा2 मिनट पठन

संकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखें

संक्षिप्त उत्तर

संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।

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विस्तृत उत्तर

संकष्टी चतुर्थी प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। यह भगवान गणेश का विशेष व्रत है।

व्रत विधि

  1. 1प्रातः स्नान करके गणेश जी का ध्यान करें।
  2. 2संकल्प: 'मैं संकष्टी चतुर्थी व्रत गणेश जी की प्रसन्नता हेतु रखता हूँ।'
  3. 3सम्पूर्ण दिन निराहार या फलाहार व्रत।
  4. 4सन्ध्याकाल में गणेश पूजा — लाल फूल, दूर्वा घास, मोदक/लड्डू, फल।
  5. 5'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र जप (108 बार)।
  6. 6गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश स्तोत्र पाठ।
  7. 7संकष्टी चतुर्थी कथा सुनें।
  8. 8चन्द्रोदय के बाद चन्द्र दर्शन: रात्रि में चन्द्रमा उदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
  9. 9चन्द्र दर्शन के बाद ही व्रत पारण (भोजन) करें — यह अनिवार्य नियम है।

सामग्री: लाल/पीले फूल, दूर्वा, मोदक, नारियल, पान-सुपारी, लाल चन्दन।

विशेष

  • मंगलवार को आने वाली संकष्टी = अंगारकी चतुर्थी — अत्यन्त शुभ।
  • महाराष्ट्र में यह व्रत अत्यन्त लोकप्रिय है।
  • विघ्न निवारण, बुद्धि वृद्धि, मनोकामना पूर्ति।
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शास्त्रीय स्रोत
गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, व्रत परम्परा
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