संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।
- 1प्रातः स्नान करके गणेश जी का ध्यान करें।
- 2संकल्प: 'मैं संकष्टी चतुर्थी व्रत गणेश जी की प्रसन्नता हेतु रखता हूँ।'
- 3सम्पूर्ण दिन निराहार या फलाहार व्रत।
- 4सन्ध्याकाल में गणेश पूजा — लाल फूल, दूर्वा घास, मोदक/लड्डू, फल।
- 5'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र जप (108 बार)।
- 6गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश स्तोत्र पाठ।
- 7संकष्टी चतुर्थी कथा सुनें।
- 8चन्द्रोदय के बाद चन्द्र दर्शन: रात्रि में चन्द्रमा उदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
- 9चन्द्र दर्शन के बाद ही व्रत पारण (भोजन) करें — यह अनिवार्य नियम है।