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व्रत📜 स्कन्द पुराण, शिव पुराण, व्रत कथा2 मिनट पठन

हरतालिका तीज व्रत कैसे रखें विधि सहित

संक्षिप्त उत्तर

हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया। निर्जला व्रत (जल भी वर्जित)। बालू से शिव-पार्वती प्रतिमा → षोडशोपचार पूजा → कथा श्रवण → रात्रि जागरण → अगले दिन पारण। कथा: पार्वती ने शिव प्राप्ति हेतु किया। सौभाग्य, मनचाहा वर।

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विस्तृत उत्तर

हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। यह सुहागिन स्त्रियों का कठोरतम व्रत है — निर्जला (बिना जल)।

व्रत विधि

  1. 1भाद्रपद शुक्ल तृतीया की पूर्व रात्रि से संकल्प।
  2. 2प्रातः स्नान → श्रृंगार → हरे वस्त्र।
  3. 3बालू/मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएँ।
  4. 4षोडशोपचार पूजा — जल, पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, फल, नैवेद्य।
  5. 5'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ गौर्यै नमः' जप।
  6. 6हरतालिका कथा सुनें।
  7. 7सम्पूर्ण दिन और रात निर्जला व्रत — जल भी वर्जित।
  8. 8रात्रि जागरण — भजन, कीर्तन, शिव स्तुति।
  9. 9अगले दिन (चतुर्थी) प्रातः स्नान → पूजा → पारण।

कथा सार: पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यह व्रत किया था। सखी ने उन्हें हर (अपहरण) कर तालिका (वन) में ले जाकर इस व्रत में सहायता की — इसी से 'हरतालिका' नाम पड़ा।

फल: सुहागिन = अखण्ड सौभाग्य। कुंवारी कन्या = मनचाहा वर प्राप्ति। शिव-पार्वती की विशेष कृपा।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, शिव पुराण, व्रत कथा
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