विस्तृत उत्तर
प्रदोष व्रत प्रत्येक मास के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी (13वीं तिथि) को रखा जाता है। यह भगवान शिव का प्रमुख व्रत है।
'प्रदोष' का अर्थ: सन्ध्याकाल (सूर्यास्त के बाद का ~2.5 घंटे का समय) — इसी समय शिव पूजा होती है।
व्रत विधि
- 1प्रातः स्नान → शिव स्मरण → संकल्प।
- 2दिनभर उपवास (फलाहार/निराहार)।
- 3प्रदोष काल में (सूर्यास्त से ~2.5 घंटे) शिव पूजा:
- ▸शिवलिंग या शिव प्रतिमा पर जलाभिषेक (दूध, दही, शहद, गन्ने का रस, पंचामृत)।
- ▸बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल, चन्दन अर्पित।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जप (108/1008 बार)।
- ▸शिव चालीसा/रुद्राष्टक पाठ।
- ▸धूप-दीप-नैवेद्य।
- 1प्रदोष व्रत कथा श्रवण।
- 2रात्रि जागरण (सम्भव हो तो)।
- 3अगले दिन प्रातः पारण।
विशेष प्रदोष
- ▸सोम प्रदोष (सोमवार): शिव-पार्वती पूजा — अत्यन्त शुभ।
- ▸शनि प्रदोष (शनिवार): शनि दोष निवारण।
- ▸महा प्रदोष: माघ/फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी — महाशिवरात्रि से एक दिन पहले।
फल: शिव कृपा, पाप नाश, मनोकामना पूर्ति, मोक्ष प्राप्ति।





