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व्रत📜 स्कन्द पुराण, धर्मसिन्धु, व्रत परम्परा1 मिनट पठन

सोमवती अमावस्या का व्रत कैसे रखें

संक्षिप्त उत्तर

सोमवती अमावस्या = सोमवार + अमावस्या। व्रत: स्नान → उपवास → पीपल की 108 परिक्रमा (कच्चा सूत) → शिव पूजा → पितृ तर्पण → दान। सुहागिनों के लिए विशेष (पति दीर्घायु)। पितृ/शनि दोष निवारण। वर्ष में 2-3 बार — दुर्लभ।

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विस्तृत उत्तर

सोमवती अमावस्या = सोमवार (Monday) को पड़ने वाली अमावस्या। यह अत्यन्त दुर्लभ और पुण्यदायी तिथि है।

व्रत विधि

  1. 1प्रातः स्नान → संकल्प → उपवास (निराहार/फलाहार)।
  2. 2पीपल वृक्ष की पूजा — जल, दूध, अक्षत, फूल चढ़ाएँ।
  3. 3पीपल की 108 परिक्रमा (सबसे प्रमुख कर्म) — कच्चा सूत लपेटते हुए।
  4. 4शिव पूजा — सोमवार + अमावस्या = शिव को अत्यन्त प्रिय।
  5. 5पितरों का तर्पण — अमावस्या पितरों का दिन, तिल-जल से तर्पण।
  6. 6गंगा/नदी स्नान (सम्भव हो तो)।
  7. 7ब्राह्मण भोजन और दान।

विशेष महत्व

  • सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यन्त शुभ — पति की दीर्घायु हेतु।
  • पितृ दोष निवारण।
  • शनि दोष शान्ति (पीपल पूजा से)।
  • अक्षय पुण्य प्राप्ति।

ध्यान रखें: वर्ष में 2-3 बार ही सोमवती अमावस्या आती है — दुर्लभ तिथि।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, धर्मसिन्धु, व्रत परम्परा
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