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सोमवती अमावस्या का व्रत कैसे रखें

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सोमवती अमावस्या = सोमवार + अमावस्या। व्रत: स्नान → उपवास → पीपल की 108 परिक्रमा (कच्चा सूत) → शिव पूजा → पितृ तर्पण → दान। सुहागिनों के लिए विशेष (पति दीर्घायु)। पितृ/शनि दोष निवारण। वर्ष में 2-3 बार — दुर्लभ।

  1. 1प्रातः स्नान → संकल्प → उपवास (निराहार/फलाहार)।
  2. 2पीपल वृक्ष की पूजा — जल, दूध, अक्षत, फूल चढ़ाएँ।
  3. 3पीपल की 108 परिक्रमा (सबसे प्रमुख कर्म) — कच्चा सूत लपेटते हुए।
  4. 4शिव पूजा — सोमवार + अमावस्या = शिव को अत्यन्त प्रिय।
  5. 5पितरों का तर्पण — अमावस्या पितरों का दिन, तिल-जल से तर्पण।
  6. 6गंगा/नदी स्नान (सम्भव हो तो)।
  7. 7ब्राह्मण भोजन और दान।
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