ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वृक्ष पूजा📜 स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भगवद्गीता (10.26), कर्म लोचन ग्रंथ2 मिनट पठन

पीपल की परिक्रमा कब और कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

पीपल परिक्रमा सूर्योदय के बाद प्रातःकाल करें, विशेषकर शनिवार को। 7 परिक्रमा सामान्य विधान है, 108 सर्वोत्तम। दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें। स्टील/पीतल के लोटे से जल में काली तिल-चावल मिलाकर चढ़ाएँ। गीता (10.26): 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्'। शनि दोष, पितृ दोष निवारण होता है।

📖

विस्तृत उत्तर

पीपल वृक्ष सनातन धर्म में सर्वाधिक पूजनीय वृक्ष है। भगवद्गीता (10.26) में श्रीकृष्ण ने कहा — 'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्' अर्थात् सभी वृक्षों में मैं पीपल हूँ। पुराणों में पीपल को साक्षात् विष्णु का स्वरूप माना गया है।

परिक्रमा का समय

सूर्योदय के पश्चात् प्रातःकाल (लगभग 7 बजे तक) पीपल की परिक्रमा और पूजा का सर्वोत्तम समय है। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से पूर्व पीपल के पास नहीं जाना चाहिए — इस समय अलक्ष्मी का वास माना गया है। शनिवार को पीपल पूजा विशेष शुभ है क्योंकि पीपल पर शनि की छाया मानी जाती है।

परिक्रमा की संख्या

विभिन्न ग्रंथों में भिन्न-भिन्न संख्या मिलती है:

  • सामान्य नित्य पूजा में 7 परिक्रमा का विधान प्रचलित है।
  • विषम संख्या (3, 5, 7, 9, 11) में परिक्रमा शुभ मानी जाती है।
  • 108 परिक्रमा सर्वाधिक शुभ मानी गई है — सोमवती अमावस्या पर स्त्रियाँ 108 परिक्रमा करती हैं।
  • विष्णु पुराण के आधार पर 3 परिक्रमा से तीनों लोकों की परिक्रमा का पुण्य, 4 परिक्रमा विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप के लिए।
  • मंगलवार को 8 परिक्रमा का विशेष विधान भी मिलता है।

परिक्रमा की विधि

  1. 1स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. 2पीपल की जड़ में जल चढ़ाएँ — स्टील या पीतल के लोटे से (तांबे के लोटे से नहीं, क्योंकि तांबा सूर्य की धातु है और सूर्य-शनि में शत्रुता है)।
  3. 3जल में काली तिल और चावल मिलाएँ।
  4. 4हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
  5. 5परिक्रमा सदैव दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में, दाहिने हाथ की ओर से) करें।
  6. 6परिक्रमा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ शं शनिश्चराय नमः' मंत्र का जप करें।
  7. 7शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष शुभ है।

फल

पीपल परिक्रमा से शनि दोष, पितृ दोष, नवग्रह दोष की निवृत्ति, धन-धान्य प्राप्ति, और मोक्ष मार्ग प्राप्त होता है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भगवद्गीता (10.26), कर्म लोचन ग्रंथ
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

पीपलपरिक्रमाशनि दोषविष्णु

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

पीपल की परिक्रमा कब और कैसे करें — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वृक्ष पूजा से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भगवद्गीता (10.26), कर्म लोचन ग्रंथ पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।