विस्तृत उत्तर
पितरों को वसु, रुद्र और आदित्य रूप इसलिए माना गया है क्योंकि शास्त्रों में तीन पीढ़ियों को ब्रह्माण्डीय देव वर्गों से जोड़ा गया है। पिता को वसु स्वरूप, पितामह को रुद्र स्वरूप और प्रपितामह को आदित्य स्वरूप माना गया है। मनुस्मृति में कहा गया है कि पिता वसु, पितामह रुद्र और प्रपितामह आदित्य कहे गए हैं और यह सनातन श्रुति है। याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध के अधिष्ठाता देवता हैं; श्राद्ध में तृप्त किए जाने पर वे मनुष्यों के विशिष्ट पितरों को तृप्त करते हैं। इसलिए पितरों को केवल मृत संबंधी नहीं, बल्कि देवस्वरूप पितृ माना जाता है।
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