विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य या यात्रा से पूर्व ईश्वर का स्मरण और मंगल कामना की जाती है।
यात्रा से पहले प्रमुख मंत्र
1गणेश मंत्र (विघ्न निवारण हेतु)
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥'
अर्थ: करोड़ सूर्यों के समान तेजस्वी, महाकाय गणेश, मेरे सभी कार्यों को सदा निर्विघ्न करें।
2विष्णु स्मरण
मंगलम् भगवान् विष्णुः मंगलम् गरुडध्वजः।
मंगलम् पुण्डरीकाक्षो मंगलायतनं हरिः॥'
अर्थ: भगवान विष्णु मंगल हैं, गरुडध्वज मंगल हैं, कमलनयन मंगल हैं, हरि मंगल के धाम हैं।
3हनुमान स्मरण
बुद्धिहीनतनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं हरहु कलेश विकार॥'
4यात्रा प्रार्थना श्लोक
स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः।
गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु॥'
5सरल मंत्र
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' (11 बार)
- ▸'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'
- ▸'जय श्री राम' या 'हरि ॐ'
परम्परागत उपाय
- ▸घर से निकलने से पहले इष्टदेव को प्रणाम करें।
- ▸दही-शक्कर खाकर निकलना शुभ माना जाता है।
- ▸दाहिना पैर पहले बाहर रखें।
- ▸माता-पिता या बड़ों के चरण स्पर्श करें।
ध्यान दें: ये परम्परागत मान्यताएँ और प्रथाएँ हैं। विशिष्ट शास्त्रीय विधान 'मुहूर्त' ग्रंथों में यात्रा प्रकरण में मिलते हैं।





