विस्तृत उत्तर
दूर्वा (दूब) घास गणेश जी को अत्यन्त प्रिय है — बिना दूर्वा गणेश पूजा अधूरी।
कैसे तोड़ें
- ▸3 या 5 पत्तियों वाली दूर्वा (गाँठ सहित) तोड़ें — विषम संख्या।
- ▸21 दूर्वा = गणेश पूजा हेतु उत्तम संख्या। 5, 7, 11 भी शुभ।
- ▸जड़ सहित न उखाड़ें — केवल ऊपरी भाग तोड़ें।
- ▸सूखी/पीली दूर्वा न चढ़ाएँ — हरी और ताज़ी।
- ▸दूर्वा के साथ फूल न हो (बीज वाली दूर्वा कुछ परम्पराओं में वर्जित)।
कब तोड़ें
- ▸प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) तोड़ना सर्वोत्तम।
- ▸चतुर्थी तिथि पर गणेश पूजा विशेष — उसी दिन ताज़ी दूर्वा।
- ▸रविवार को दूर्वा न तोड़ें (कुछ परम्पराओं में)।
- ▸पूजा से कुछ समय पहले तोड़ें — ताज़ी रहे।
कैसे चढ़ाएँ
- ▸दूर्वा को जल से धोकर शुद्ध करें।
- ▸गणेश जी के मस्तक/चरणों पर अर्पित।
- ▸'ॐ गं गणपतये नमः' या 'दूर्वांकुरैर्यथा गणेशो दूर्वा प्रियः...' मंत्र।
- ▸21 दूर्वा की माला बनाकर भी चढ़ा सकते हैं (गणेश चतुर्थी पर)।
दूर्वा क्यों प्रिय
गणेश पुराण: अनलासुर नामक दैत्य को गणेश ने निगल लिया, तब शरीर में अत्यन्त ताप हुआ — ऋषियों ने 21 दूर्वा चढ़ाकर शीतलता प्रदान की। तभी से दूर्वा गणेश को शीतलता और प्रसन्नता देती है।





