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गणेश उपासना📜 गणेश पुराण, पूजा विधान2 मिनट पठन

गणेश पूजा में दूर्वा कैसे तोड़ें और कब तोड़ें

संक्षिप्त उत्तर

गणेश दूर्वा: 3/5 पत्तियों वाली, हरी-ताज़ी, गाँठ सहित। 21 संख्या उत्तम। प्रातः तोड़ें, रविवार वर्जित (कुछ में)। जड़ न उखाड़ें, सूखी/पीली वर्जित। धोकर, 'ॐ गं...' बोलकर मस्तक पर। कथा: अनलासुर ताप शमन हेतु 21 दूर्वा → शीतलता।

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विस्तृत उत्तर

दूर्वा (दूब) घास गणेश जी को अत्यन्त प्रिय है — बिना दूर्वा गणेश पूजा अधूरी।

कैसे तोड़ें

  • 3 या 5 पत्तियों वाली दूर्वा (गाँठ सहित) तोड़ें — विषम संख्या।
  • 21 दूर्वा = गणेश पूजा हेतु उत्तम संख्या। 5, 7, 11 भी शुभ।
  • जड़ सहित न उखाड़ें — केवल ऊपरी भाग तोड़ें।
  • सूखी/पीली दूर्वा न चढ़ाएँ — हरी और ताज़ी।
  • दूर्वा के साथ फूल न हो (बीज वाली दूर्वा कुछ परम्पराओं में वर्जित)।

कब तोड़ें

  • प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) तोड़ना सर्वोत्तम।
  • चतुर्थी तिथि पर गणेश पूजा विशेष — उसी दिन ताज़ी दूर्वा।
  • रविवार को दूर्वा न तोड़ें (कुछ परम्पराओं में)।
  • पूजा से कुछ समय पहले तोड़ें — ताज़ी रहे।

कैसे चढ़ाएँ

  • दूर्वा को जल से धोकर शुद्ध करें।
  • गणेश जी के मस्तक/चरणों पर अर्पित।
  • 'ॐ गं गणपतये नमः' या 'दूर्वांकुरैर्यथा गणेशो दूर्वा प्रियः...' मंत्र।
  • 21 दूर्वा की माला बनाकर भी चढ़ा सकते हैं (गणेश चतुर्थी पर)।

दूर्वा क्यों प्रिय

गणेश पुराण: अनलासुर नामक दैत्य को गणेश ने निगल लिया, तब शरीर में अत्यन्त ताप हुआ — ऋषियों ने 21 दूर्वा चढ़ाकर शीतलता प्रदान की। तभी से दूर्वा गणेश को शीतलता और प्रसन्नता देती है।

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शास्त्रीय स्रोत
गणेश पुराण, पूजा विधान
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