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दूर्वा प्रश्नोत्तरी — 6 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित दूर्वा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 6 प्रश्न

गणेश पूजा सामग्री

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है और कितनी चढ़ाएं?

अनलासुर निगलने → अग्नि ताप → 88,000 ऋषियों ने दूर्वा दी → शीतलता। 21 दूर्वा सर्वप्रचलित। 3/5 पत्ती गांठ, ताजी हरी, जड़ सहित। 101 = विशेष।

दूर्वागणेशकारण
षोडशोपचार पूजा

मकर संक्रांति पर कौन से फूल चढ़ाते हैं?

मकर संक्रांति पर सूर्य देव को: लाल पुष्प (गुड़हल, कमल या कनेर) — ये सूर्य देव को अत्यंत प्रिय हैं। साथ में दूर्वा घास भी अर्पित करें। अर्घ्य जल में भी लाल पुष्प डालें।

सूर्य पुष्पगुड़हल कमल कनेरलाल पुष्प
पूजा विधि

नंदी के कान में क्या बोलें?

हाथ में दूर्वा (घास) लें, नंदी के बाएं कान में 3 बार अपनी इच्छा बोलें, फिर 3 बार 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' बोलकर वह दूर्वा नंदी जी को चढ़ा दें।

नंदी पूजनमनोकामनादूर्वा
पूजा विधि

गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

गणेश जी को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ानी चाहिए। दूर्वा अमृत का प्रतीक है जो भगवान गणेश को शीतलता प्रदान करती है।

दूर्वा21 गांठेंअमृत तत्व
देवी-देवता पूजन

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?

मुद्गल पुराण के अनुसार अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में जलन हुई, जो केवल 21 दूर्वा खाने से शांत हुई। तभी से गणेश को दूर्वा अर्पण की परंपरा है। दूर्वा गणेश को सर्वाधिक प्रिय है।

गणेशदूर्वादूब
गणेश उपासना

गणेश पूजा में दूर्वा कैसे तोड़ें और कब तोड़ें

गणेश दूर्वा: 3/5 पत्तियों वाली, हरी-ताज़ी, गाँठ सहित। 21 संख्या उत्तम। प्रातः तोड़ें, रविवार वर्जित (कुछ में)। जड़ न उखाड़ें, सूखी/पीली वर्जित। धोकर, 'ॐ गं...' बोलकर मस्तक पर। कथा: अनलासुर ताप शमन हेतु 21 दूर्वा → शीतलता।

गणेशदूर्वाघास

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।