विस्तृत उत्तर
सतीजी ने आकाश में अनेक प्रकार के सुन्दर विमान जाते देखे — देवसुन्दरियाँ मधुर गान कर रही थीं। उन्होंने शिवजी से पूछा कि ये कहाँ जा रहे हैं। शिवजी ने बताया कि उनके पिता दक्ष के घर बड़ा यज्ञ हो रहा है।
सतीजी ने सोचा कि पिता के घर यज्ञ-उत्सव है — यदि महादेवजी आज्ञा दें तो मैं कुछ दिन पिता के घर रहकर आऊँ। शिवजी द्वारा पत्नी-रूप में त्यागे जाने से उनके हृदय में पहले से भारी दुख था, इसलिये पिता के घर जाने का बहाना मिल गया।
चौपाई — 'पति परित्याग हृदयँ दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी। बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी॥'
अर्थ — पतिद्वारा त्यागी जानेका बड़ा भारी दुख उनके हृदयमें था, पर अपना अपराध समझकर वे कुछ कहती न थीं। आखिर सतीजी भय, संकोच और प्रेमरसमें सनी हुई मनोहर वाणीसे बोलीं।
दोहा — 'पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ। तौ मैं जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ॥' — हे प्रभो! पिता के घर बड़ा उत्सव है, यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं आदरसहित उसे देखने जाऊँ।





