विस्तृत उत्तर
देवताओं की करुण पुकार, तारकासुर के संहार की अनिवार्यता और शिव को समाधि से बाहर निकालकर पुनः गृहस्थ जीवन में लाने के लिए, आदि पराशक्ति ने हिमालय और मेनावती के घर 'पार्वती' के रूप में अवतार लिया।
यह जन्म अत्यंत आवश्यक था क्योंकि शिव की असीम ऊर्जा को धारण करने के लिए हिमालय जैसे अचल आधार की आवश्यकता थी।





