विस्तृत उत्तर
पूर्व कल्प में, जगतमाता जगदम्बा ने संसार के कल्याण और उद्धार के लिए ब्रह्मा के पुत्र प्रजापति दक्ष और मनु की पुत्री प्रसूति के घर 'सती' के रूप में अवतार लिया था। सती के रूप में उनका विवाह देवाधिदेव महादेव (आदियोगी शिव) से हुआ था।
इस अवतार का मुख्य उद्देश्य शिव जैसे परम तपस्वी को एक 'संसारनाथ' (पारिवारिक पुरुष) के रूप में स्थापित कर सृष्टि के संतुलन को बनाए रखना था।





