का सरल उत्तर
शिव ने 'जटिल ब्रह्मचारी' वेश में आकर स्वयं की निंदा की। पार्वती क्रोधित हुईं और कहा: 'शिव की निंदा करने वाला पाप का भागी।' जाने लगीं तब शिव अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और पार्वती का हाथ थाम लिया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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