विस्तृत उत्तर
पिंगलेश्वर अग्नि और सूर्य तत्त्व प्रधान है, अतः यहाँ प्रणव (ॐ) युक्त मूल पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप अत्यंत फलदायी है जो सुषुम्ना नाड़ी को जाग्रत करता है। इसके साथ ही पूर्ण एकाग्रता के साथ 'काशी विश्वनाथ ध्यान मंत्र' (सानन्दमानन्दवने वसन्तं...) का गान करना चाहिए। जन्म-मरण के दुःख नाश करने वाले 'लिंगाष्टकम' (ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिङ्गं...) का सस्वर पाठ यहाँ जन्म-जन्मांतर के अज्ञान और पापों को नष्ट करता है।

