विस्तृत उत्तर
पूजा में कई प्रामाणिक मंत्र हैं। वैदिक मंत्र (ऋग्वेद): "ॐ शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयोरभिस्रवन्तु नः॥" तांत्रिक मूल मंत्र: "ॐ शं शनैश्चराय नमः"। बीज मंत्र: "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"। कलयुग में शनि के लिए 23,000 मंत्रों का अनुष्ठान श्रेष्ठ है; नित्य व्रत में 108 बार जप अनिवार्य है। इसके अलावा, साढ़ेसाती में पद्म पुराण का 'दशरथ कृत शनि स्तोत्र' राम-बाण औषधि है, जिसमें शनि के 10 नामों का उल्लेख है। दुर्घटनाओं से बचने के लिए 'शनि वज्रपंजर कवच' (ब्रह्मांड पुराण) का पाठ करें। चूँकि शनि ने हनुमान जी को भक्तों की रक्षा का वचन दिया था, अतः शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी करना चाहिए।





