विस्तृत उत्तर
जल भरते समय जल के देवता 'वरुण' का आवाह्न किया जाता है। इस समय निम्नलिखित अत्यंत पवित्र वैदिक मंत्रों का गान किया जाता है:
१. 'ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दवः। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद् रयिः॥' — हे कलश! आप हमारी ओर अभिमुख हों। आनंददायक और जीवनदायी जल-बिंदु आपमें प्रवेश करें।
२. 'ॐ वसोः पवित्रमसि शतधारं वसोः पवित्रमसि सहस्रधारम्। देवस्त्वा सविता पुनातु वसोः पवित्रेण शतधारेण सुप्वा कामधुक्षः॥' — हे जल! आप सैकड़ों और हजारों धाराओं वाले पवित्रकर्ता हैं।
३. 'ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम॥' — सृष्टि के आरंभ में हिरण्यगर्भ ही विद्यमान थे।





