विस्तृत उत्तर
वैदिक और तांत्रिक कर्मकांड में बिना संकल्प के किया गया कोई भी कर्म फलदायी नहीं होता। 'संकल्प' का अर्थ है दृढ़ निश्चय।
संकल्प की क्रमबद्ध विधि:
१. गणपति ध्यान: सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश का ध्यान करें: 'शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥'
२. प्राणायाम: 'ॐ भूः ॐ भुवः ओम् सुवः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ओम् सत्यम्। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।...' फिर 'ॐ, ॐ, ॐ' कहते हुए तीन बार दोनों कानों का स्पर्श करें।
३. मुख्य महासंकल्प: दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प, कुशा और सिक्का लेकर देश-काल का कीर्तन करते हुए बोलें:
'ममोपात्त-समस्त-दुरितक्षय-द्वारा, श्री भगवती दुर्गा प्रीत्यर्थम्, अस्माकं सहकुटुम्बानां क्षेम, धैर्य, विजय, आयुः, आरोग्य, ऐश्वर्य अभिवृद्ध्यर्थम्...'
अंत में: 'श्री नवदुर्गा देवता प्रीत्यर्थं कलश-स्थापनं तथा च नवदरात्र-व्रतमहं करिष्ये।' — यह कहकर जल और सामग्री भूमि पर या पात्र में छोड़ दें।





