विस्तृत उत्तर
हिरण्यगर्भ ब्रह्मा जी का सार्वभौमिक स्वरूप है। हिरण्य का अर्थ है स्वर्णिम और गर्भ का अर्थ है गर्भ या केंद्र — इस प्रकार हिरण्यगर्भ का अर्थ है ब्रह्माण्ड का स्वर्णिम केंद्र या प्रथम जीव। सत्यलोक पहुँचने वाले जीवों की दूसरी श्रेणी वे उपासक हैं जो हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा के सार्वभौमिक स्वरूप) या सगुण ब्रह्म की निष्काम उपासना करते हैं। ये उपासक सगुण ब्रह्म की भक्ति के माध्यम से देवयान मार्ग से सत्यलोक पहुँचते हैं और वहाँ ब्रह्मा जी के सान्निध्य में रहते हुए क्रम मुक्ति के माध्यम से अंततः महाप्रलय में परब्रह्म में लीन हो जाते हैं। निष्काम उपासना यहाँ अनिवार्य है — सकाम उपासना से सत्यलोक नहीं मिलता।
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