विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) के अनुसार, कुक्कुटेश्वर शिवलिंग का स्वरूप "अण्डाकार" (Egg-shaped) है। तात्विक दृष्टि से यह अण्डाकार स्वरूप अत्यंत रहस्यमयी है, जो भारतीय दर्शन के "हिरण्यगर्भ" (Cosmic Egg) का प्रतीक है, जिससे संपूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति मानी जाती है। शिव का लिंग स्वरूप भी उसी असीमित और अनंत ब्रह्मांड का प्रतीक है जहाँ से सृष्टि उत्पन्न होती है और प्रलय के पश्चात विलीन हो जाती है। प्रकृति में कुक्कुट का जन्म भी अण्ड से ही होता है, अतः इसका अण्डाकार होना सृजन (Creation), अव्यक्त से व्यक्त होने की सनातन प्रक्रिया और ब्रह्मांडीय गर्भाशय का एक सुविचारित तांत्रिक प्रतीक है। यह उस अवस्था का द्योतक है जहाँ शिव (चेतना) और शक्ति (प्रकृति) एकीभूत होकर सृष्टि के बीज रूप में विद्यमान रहते हैं।





