विस्तृत उत्तर
अद्वैत वेदांत और उच्चस्तरीय शैव-तंत्र में 'मारण' का अर्थ किसी भौतिक शत्रु का विनाश करना (जादू-टोना) नहीं है, बल्कि साधक के भीतर बैठे षड्रिपुओं (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर) और 'अहंकार' का समूल संहार कर अज्ञान को ज्ञान की अग्नि में भस्म करना है। इसी प्रकार, 'मोहन' का वास्तविक अर्थ वशीकरण नहीं, बल्कि सांसारिक विषयों से मन को हटाकर उसे परमतत्त्व शिव की चेतना में मुग्ध कर देना (आध्यात्मिक सम्मोहन) है।





