विस्तृत उत्तर
हठयोग और तंत्र के अनुसार, मानव देह के दाहिने भाग में 'पिंगला नाड़ी' प्रवाहित होती है, जो सूर्य तत्त्व और अग्नि (तेज) का पूर्ण प्रतीक है। पिंगला नाड़ी काल, भस्म करने वाले तेज और संहारक शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती है। पिंगलेश्वर लिंग का 'पिंगल' गण वस्तुतः इसी ब्रह्मांडीय अग्नि और तेज का मानवीकरण या सगुण रूप है। तात्विक दृष्टि से, यहाँ साधना करने पर साधक पाषाण पूजा के साथ-साथ अपने भीतर की पिंगला नाड़ी में सुप्त सूर्य-ऊर्जा को जाग्रत कर रहा होता है।