विस्तृत उत्तर
मेष लग्न (अग्नि तत्व) के लिए चतुर्थ भाव का स्वामी चंद्रमा और नवम भाव का स्वामी देवगुरु बृहस्पति होता है। जब ये दोनों (चतुर्थेश और नवमेश) परस्पर केंद्र में होते हैं, तो कहल योग के साथ-साथ अत्यंत शुभ और शक्तिशाली 'गजकेसरी योग' का भी स्वतः निर्माण हो जाता है। इसके प्रभाव से ऐसा जातक अत्यंत दयालु, न्यायप्रिय, और जन-जन का प्रिय नेता होता है।





