विस्तृत उत्तर
वृषभ लग्न में नवम और दशम दोनों भावों का स्वामी अकेला 'शनि' होता है, जो अकेले ही परम राजयोगकारक बन जाता है। वृश्चिक लग्न में नवमेश चन्द्रमा और दशमेश सूर्य होते हैं; दोनों राजसी ग्रह हैं और इन्हें अष्टमेश का दोष नहीं लगता। इसलिए इन दोनों लग्नों के लिए यह योग अत्यंत पवित्र और सर्वोत्तम फलदायी होता है।





