विस्तृत उत्तर
भारत के 'लौह पुरुष' सरदार पटेल की वृषभ लग्न की कुंडली थी। इसमें चतुर्थेश सूर्य 6ठे भाव में और नवमेश शनि 9वें भाव में स्थित था। इस प्रकार सूर्य और शनि परस्पर 4/10 अक्ष पर (केंद्र में) स्थित थे। लग्नेश शुक्र भी अत्यंत मजबूत था। सूर्य (शासन) और शनि (लोकतंत्र) के इसी कड़े घर्षण और शक्तिशाली कहल योग के कारण उन्होंने 500 से अधिक रियासतों को अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और कूटनीति से एक किया था।
