विस्तृत उत्तर
कामिका आगम के अनुसार दारा नगर के महाकालेश्वर लिंग को 'सिद्ध लिंग' की सर्वोच्च श्रेणी में रखा गया है। चूँकि इस लिंग की स्थापना साक्षात 'महाकाल' नामक परम शिव गण द्वारा की गई है, इसलिए यह पूर्णतः सिद्ध लिंग की परिभाषा को चरितार्थ करता है। सिद्ध लिंग वे होते हैं जिनमें स्थापनाकर्ता के तपोबल और शिव-सायुज्य के कारण शिव की 'चित्-शक्ति' (Consciousness) और 'आनंद-शक्ति' (Bliss) का स्थायी और सघन आधान हो जाता है।
तात्त्विक दृष्टि से, सिद्ध लिंग वह अवस्था है जहाँ निराकार (Non-manifest) और साकार (Manifest) शिव का पूर्ण तादात्म्य होता है। शैव तंत्र के अनुसार यह लिंग अमूर्त आध्यात्मिक अनुभव को भौतिक धरातल पर संप्रेषित करने का एक जाग्रत 'यंत्र' बन जाता है। जब साधक इसके समक्ष बैठता है, तो ऊर्जा का मूलाधार से आज्ञा चक्र तक अत्यंत तीव्र गति से ऊर्ध्वगमन होता है।





