शिव मंदिरमहाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।#श्मशान भस्म#महाकालेश्वर#भस्म आरती
शिव मंदिरउज्जैन महाकालेश्वर की भस्म आरती का रहस्य क्या है?12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर में भस्म आरती। सुबह 4 बजे, ~2 घंटे। पौराणिक: दूषण राक्षस भस्म → शिव श्रृंगार। प्राचीन: श्मशान भस्म; वर्तमान: गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी। अघोर मंत्र से भस्म रमाना। निराकार दर्शन = मोक्ष। 6 दैनिक आरतियां।#महाकालेश्वर#भस्म आरती#उज्जैन
ज्योतिर्लिंगमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन में ही क्यों है?उज्जैन में दूषण राक्षस के अत्याचार से त्रस्त शिवभक्तों की पुकार पर शिव भूमि फाड़कर प्रकट हुए और दूषण का वध किया। भक्तों के अनुरोध पर वे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग रूप में वहीं विराजित हो गए। काल के स्वामी होने से 'महाकाल' कहलाए।#महाकालेश्वर#उज्जैन#महाकाल
आगमशास्त्र और दर्शनकाशी के महाकालेश्वर शिवलिंग को 'सिद्ध लिंग' क्यों कहा जाता है और इसका तात्त्विक अर्थ क्या है?इसे शिव गण 'महाकाल' ने स्थापित किया है, इसलिए यह कामिका आगम के अनुसार 'सिद्ध लिंग' है। इसमें शिव की चित् और आनंद शक्ति का स्थायी आधान होता है जो ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन का जाग्रत यंत्र है।#सिद्ध लिंग#कामिका आगम#महाकालेश्वर
तीर्थ एवं धार्मिक स्थलउज्जैन महाकालेश्वर के दर्शन का समयमहाकालेश्वर में भस्म आरती सुबह 4-6 बजे, दद्योदक आरती 7-7:45 बजे, भोग आरती 10-10:45 बजे, संध्या आरती 7-7:45 बजे और शयन आरती रात 10:30-11 बजे होती है। भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक है।#महाकालेश्वर#उज्जैन#भस्म आरती
तीर्थ यात्राउज्जैन महाकालेश्वर दर्शन कैसे करेंदक्षिणमुखी (एकमात्र) ज्योतिर्लिंग। भस्म आरती 4AM = अवश्य (ऑनलाइन बुक)। 4AM-11PM। महाकाल लोक नया। काल भैरव (मदिरा अर्पित)। सिंहस्थ कुंभ। इंदौर ~55km।#उज्जैन#महाकालेश्वर#दर्शन