का सरल उत्तर
इसे शिव गण 'महाकाल' ने स्थापित किया है, इसलिए यह कामिका आगम के अनुसार 'सिद्ध लिंग' है। इसमें शिव की चित् और आनंद शक्ति का स्थायी आधान होता है जो ऊर्जा के ऊर्ध्वगमन का जाग्रत यंत्र है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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