विस्तृत उत्तर
ज्ञान और वाक् की देवी होने के नाते, माँ सरस्वती को तंत्र शास्त्रों में 'मातृका शक्ति' (Sanskrit Alphabets) के रूप में पूजा जाता है।
संस्कृत वर्णमाला में कुल ५१ अक्षर (मातृकाएं) हैं, जिनमें १६ स्वर, ५ अर्द्धस्वर और ३० व्यंजन शामिल हैं। तांत्रिक दर्शन के अनुसार, ये ५१ अक्षर केवल भाषा के चिह्न नहीं हैं, बल्कि ये वे ५१ मूल ध्वनियाँ या आवृत्तियां (Frequencies) हैं जिनसे इस संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण हुआ है।
सरस्वती को इन्हीं मातृकाओं की देवी माना जाता है। गंधर्व तंत्र में 'मातृका चक्र' या 'कूर्म चक्र' का वर्णन है, जिसका उपयोग मंत्रों को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।
अतः, सरस्वती के किसी भी बीज मंत्र का शुद्ध उच्चारण सीधे इस ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) को जाग्रत करता है।
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