विस्तृत उत्तर
विशुद्ध तांत्रिक ग्रंथों (जैसे महानिर्वाण तंत्र, तोडल तंत्र) में 'वार' (दिन) की बजाय 'तिथि' (विशेषकर अमावस्या की मध्यरात्रि) को काली पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। तंत्र में शनिवार का कोई प्रत्यक्ष आदेश नहीं है। लेकिन, वैदिक ज्योतिष ग्रंथों (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका, जातक पारिजात) में शनि और राहु के कुप्रभावों (जैसे साढ़े साती) को कम करने के लिए उग्र देवियों (दुर्गा या भद्रकाली) की उपासना का स्पष्ट विधान है। अतः यह व्रत एक तांत्रिक अनिवार्यता नहीं, बल्कि एक सिद्ध 'ज्योतिष-धार्मिक' उपाय (Astrological Remedy) है।





