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मुहूर्त एवं योग📜 मुहूर्त चिन्तामणि, पंचांग, ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने से क्या लाभ मिलता है

संक्षिप्त उत्तर

सर्वार्थ सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र संयोग = सभी कार्य सिद्ध। पूजा = कई गुना फल, मंत्र सिद्धि, मनोकामना पूर्ति। गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, खरीद — सभी शुभ। अन्य दोषों को भी क्षीण करता है। पंचांग में तिथि देखें।

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विस्तृत उत्तर

सर्वार्थ सिद्धि योग = 'सर्व' (सभी) + 'अर्थ' (कार्य) + 'सिद्धि' (पूर्णता) — जिसमें सभी कार्य सिद्ध हों।

कब बनता है

विशिष्ट वार (दिन) और विशिष्ट नक्षत्र के संयोग से। उदाहरण:

  • रविवार + पुष्य/हस्त/उत्तराफाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा/उत्तराभाद्रपद/अश्विनी
  • सोमवार + रोहिणी/मृगशिरा/श्रवण/हस्त
  • मंगलवार + अश्विनी/उत्तराफाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा

(और भी कई संयोग — पंचांग में देखें)

पूजा से लाभ

  1. 1इस योग में की गई पूजा सामान्य से कई गुना अधिक फलदायी।
  2. 2मनोकामना पूर्ति — जो भी कामना से पूजा करें, वह सिद्ध।
  3. 3देवता विशेष कृपा प्रदान करते हैं।
  4. 4मंत्र सिद्धि — इस योग में मंत्र जप शीघ्र सिद्ध।
  5. 5अनुष्ठान, दीक्षा, व्रत आरम्भ सर्वोत्तम।

अन्य शुभ कार्य

  • गृह प्रवेश, विवाह, मुण्डन, उपनयन।
  • नया व्यापार, नौकरी आरम्भ।
  • सम्पत्ति/वाहन/स्वर्ण खरीद।
  • यात्रा आरम्भ।

विशेष: सर्वार्थ सिद्धि योग अन्य दोषों (राहुकाल आदि) को भी क्षीण करता है — अतः इसमें किया गया कार्य प्रायः शुभ फलदायी।

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शास्त्रीय स्रोत
मुहूर्त चिन्तामणि, पंचांग, ज्योतिष शास्त्र
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