विस्तृत उत्तर
सर्वार्थ सिद्धि योग = 'सर्व' (सभी) + 'अर्थ' (कार्य) + 'सिद्धि' (पूर्णता) — जिसमें सभी कार्य सिद्ध हों।
कब बनता है
विशिष्ट वार (दिन) और विशिष्ट नक्षत्र के संयोग से। उदाहरण:
- ▸रविवार + पुष्य/हस्त/उत्तराफाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा/उत्तराभाद्रपद/अश्विनी
- ▸सोमवार + रोहिणी/मृगशिरा/श्रवण/हस्त
- ▸मंगलवार + अश्विनी/उत्तराफाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा
(और भी कई संयोग — पंचांग में देखें)
पूजा से लाभ
- 1इस योग में की गई पूजा सामान्य से कई गुना अधिक फलदायी।
- 2मनोकामना पूर्ति — जो भी कामना से पूजा करें, वह सिद्ध।
- 3देवता विशेष कृपा प्रदान करते हैं।
- 4मंत्र सिद्धि — इस योग में मंत्र जप शीघ्र सिद्ध।
- 5अनुष्ठान, दीक्षा, व्रत आरम्भ सर्वोत्तम।
अन्य शुभ कार्य
- ▸गृह प्रवेश, विवाह, मुण्डन, उपनयन।
- ▸नया व्यापार, नौकरी आरम्भ।
- ▸सम्पत्ति/वाहन/स्वर्ण खरीद।
- ▸यात्रा आरम्भ।
विशेष: सर्वार्थ सिद्धि योग अन्य दोषों (राहुकाल आदि) को भी क्षीण करता है — अतः इसमें किया गया कार्य प्रायः शुभ फलदायी।





