विस्तृत उत्तर
प्रत्येक ग्रह दोष के लिए विशिष्ट मंत्र निर्धारित हैं:
नवग्रह बीज मंत्र और जप संख्या
- 1सूर्य दोष: 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' — 7,000 जप। गायत्री मंत्र भी अत्यंत प्रभावी।
- 2चन्द्र दोष: 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः' — 11,000 जप। महामृत्युंजय मंत्र।
- 3मंगल दोष: 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' — 10,000 जप। हनुमान चालीसा।
- 4बुध दोष: 'ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' — 9,000 जप। विष्णु सहस्रनाम।
- 5गुरु (बृहस्पति) दोष: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' — 19,000 जप। दक्षिणामूर्ति स्तोत्र।
- 6शुक्र दोष: 'ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः' — 16,000 जप। लक्ष्मी स्तोत्र।
- 7शनि दोष: 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' — 23,000 जप। हनुमान चालीसा, शनि स्तोत्र।
- 8राहु दोष: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' — 18,000 जप। दुर्गा सप्तशती।
- 9केतु दोष: 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' — 17,000 जप। गणेश अथर्वशीर्ष।
सर्वग्रह शांति: गायत्री मंत्र सभी ग्रहों की शांति में सहायक। महामृत्युंजय मंत्र भी सर्वग्रह शांति हेतु।
विशेष: ग्रह मंत्र का जप सम्बंधित ग्रह के वार (दिन) पर आरम्भ करना शुभ — रवि=रविवार, चन्द्र=सोमवार... ज्योतिषी से कुंडली देखकर सही ग्रह निर्धारित करवाएँ।





