विस्तृत उत्तर
गुरु पुष्य योग = गुरुवार (बृहस्पतिवार) + पुष्य नक्षत्र। यह भी अत्यन्त शुभ मुहूर्त है।
क्यों विशेष
- ▸बृहस्पति (गुरु) = देवगुरु, ज्ञान-धन-सौभाग्य का कारक।
- ▸पुष्य = पोषण, वृद्धि, समृद्धि का नक्षत्र।
- ▸दोनों का संयोग = धन-समृद्धि-ज्ञान का सर्वोत्तम मुहूर्त।
खरीदारी
- ▸स्वर्ण, चाँदी, हीरा, रत्न खरीदना सर्वोत्तम — 'अक्षय' फल।
- ▸सम्पत्ति (भूमि, मकान) खरीद।
- ▸वाहन खरीद।
- ▸नया व्यापार/दुकान/कार्यालय उद्घाटन।
- ▸नई औषधि, नया पाठ्यक्रम आरम्भ।
पूजा
- ▸बृहस्पति/गुरु पूजा — पीले वस्त्र, पीले फूल, चना दाल, हल्दी।
- ▸विष्णु/लक्ष्मी पूजा — धन प्राप्ति।
- ▸गुरु मंत्र: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः'।
- ▸दक्षिणामूर्ति (ज्ञान के गुरु शिव) पूजा।
अवधि
रवि पुष्य से अधिक बार आता है (मासिक सम्भावना), किन्तु इसकी भी गणना ज्योतिषी से कराएँ।
ध्यान रखें: पुष्य नक्षत्र में विवाह वर्जित माना गया है (वर-वधू पक्ष हेतु), किन्तु अन्य सभी शुभ कार्य श्रेष्ठ।




