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मुहूर्त एवं योग📜 मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

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विस्तृत उत्तर

गुरु पुष्य योग = गुरुवार (बृहस्पतिवार) + पुष्य नक्षत्र। यह भी अत्यन्त शुभ मुहूर्त है।

क्यों विशेष

  • बृहस्पति (गुरु) = देवगुरु, ज्ञान-धन-सौभाग्य का कारक।
  • पुष्य = पोषण, वृद्धि, समृद्धि का नक्षत्र।
  • दोनों का संयोग = धन-समृद्धि-ज्ञान का सर्वोत्तम मुहूर्त।

खरीदारी

  • स्वर्ण, चाँदी, हीरा, रत्न खरीदना सर्वोत्तम — 'अक्षय' फल।
  • सम्पत्ति (भूमि, मकान) खरीद।
  • वाहन खरीद।
  • नया व्यापार/दुकान/कार्यालय उद्घाटन।
  • नई औषधि, नया पाठ्यक्रम आरम्भ।

पूजा

  • बृहस्पति/गुरु पूजा — पीले वस्त्र, पीले फूल, चना दाल, हल्दी।
  • विष्णु/लक्ष्मी पूजा — धन प्राप्ति।
  • गुरु मंत्र: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' या 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः'।
  • दक्षिणामूर्ति (ज्ञान के गुरु शिव) पूजा।

अवधि

रवि पुष्य से अधिक बार आता है (मासिक सम्भावना), किन्तु इसकी भी गणना ज्योतिषी से कराएँ।

ध्यान रखें: पुष्य नक्षत्र में विवाह वर्जित माना गया है (वर-वधू पक्ष हेतु), किन्तु अन्य सभी शुभ कार्य श्रेष्ठ।

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शास्त्रीय स्रोत
मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र
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