लोकशिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।#शिशुमार चक्र#देवता#नक्षत्र
ज्योतिष ज्ञाननक्षत्र और राशि में क्या अंतर है?राशि=12 भाग(30°), नक्षत्र=27 भाग(13°20')। 1 राशि=2¼ नक्षत्र। राशि=सामान्य, नक्षत्र=सूक्ष्म। नक्षत्र=वैदिक ज्योतिष मूल। राशि=शहर, नक्षत्र=मोहल्ला।#नक्षत्र#राशि#अंतर
लोककाम्य श्राद्ध क्या है?विशेष कामना की पूर्ति के लिए किया गया श्राद्ध काम्य श्राद्ध है।#काम्य श्राद्ध#धन संतान विजय#नक्षत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी के जन्म के समय कौन सा नक्षत्र/मुहूर्त था?अभिजित् मुहूर्त — भगवान का प्रिय, दिन का सबसे शुभ मुहूर्त, मध्याह्न (दोपहर) के समय। 'सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता' — न सर्दी न गर्मी, सब लोकों को शान्ति देने वाला पवित्र काल।#बालकाण्ड#अभिजित मुहूर्त#राम जन्म
ज्योतिष दोष एवं उपायमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए कौन सी पूजा27वें दिन मूल शांति पूजा (पंडित), गणेश पूजा, नवग्रह हवन, महामृत्युंजय, दान। मूल = अशुभ नहीं, शक्तिशाली। कई महान व्यक्ति मूल जन्मे। अत्यधिक भय अनुचित — शांति पूजा कराएं।#मूल#नक्षत्र#जन्म
पंचांग एवं कैलेंडरनक्षत्र अनुसार शुभ कार्य कैसे तय करें27 नक्षत्र = शुभ/अशुभ। विवाह: रोहिणी, मृगशिरा, स्वाति, अनुराधा। खरीदारी: पुष्य सर्वोत्तम। यात्रा: अश्विनी, पुष्य, रेवती। पंचांग/ऐप = सरलतम — आज का नक्षत्र+शुभ/अशुभ दिखता है।#नक्षत्र#शुभ कार्य#मुहूर्त
मुहूर्तरवि पुष्य नक्षत्र योग में क्या खरीदेंरविवार+पुष्य नक्षत्र = सोना/आभूषण (सबसे प्रचलित), संपत्ति, वाहन, रत्न, व्यापार सामग्री। ~1-2 बार/माह। पुष्य=सबसे शुभ खरीदारी नक्षत्र + रवि=सूर्य तेज।#रवि पुष्य#नक्षत्र#खरीदारी
संस्कार विधिनामकरण संस्कार में नाम रखने के शास्त्रीय नियम क्या हैं?नामकरण नियम: जन्म नक्षत्र अक्षर, ब्राह्मण=शर्मा/क्षत्रिय=वर्मा/वैश्य=गुप्त (मनुस्मृति), सम अक्षर (2,4) शुभ, देवता/शुभ अर्थ, सरल उच्चारण, गोपनीय+लौकिक दो नाम। पिता कान में बोले → शहद से 'ॐ' लिखें।#नामकरण#संस्कार#नाम
मुहूर्त एवं योगगुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व हैगुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।#गुरु पुष्य#नक्षत्र#खरीदारी
मुहूर्त एवं योगरवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व हैरवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।#रवि पुष्य#नक्षत्र#शुभ योग
मंत्र जप ज्ञानजन्म नक्षत्र के अनुसार मंत्र का चयन कैसे करें?27 नक्षत्र = 27 देवता। जन्म नक्षत्र → नक्षत्र देवता → मंत्र। आर्द्रा=रुद्र='ॐ नमः शिवाय', स्वाति=वायु=हनुमान। ज्योतिषी/गुरु से कुंडली→इष्ट→मंत्र। ज्योतिष आधारित।#नक्षत्र#जन्म#मंत्र