ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
टैग

नक्षत्र से जुड़े सभी प्रश्न(12)

नक्षत्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 12 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

शिशुमार चक्र के विभिन्न अंगों में कौन-कौन से देवता और नक्षत्र हैं?

शिशुमार चक्र में ध्रुव (पूंछ), सप्तर्षि (कूल्हे), आकाशगंगा (पेट), नारायण (हृदय), मंगल (मुख), शनि (जननांग), बृहस्पति (गर्दन), चंद्र (मन) और बुध (श्वास) में हैं।

#शिशुमार चक्र#देवता#नक्षत्र
ज्योतिष ज्ञान

नक्षत्र और राशि में क्या अंतर है?

राशि=12 भाग(30°), नक्षत्र=27 भाग(13°20')। 1 राशि=2¼ नक्षत्र। राशि=सामान्य, नक्षत्र=सूक्ष्म। नक्षत्र=वैदिक ज्योतिष मूल। राशि=शहर, नक्षत्र=मोहल्ला।

#नक्षत्र#राशि#अंतर
योगी की शक्तियाँ

योगी देवताओं, ग्रहों और भुवनों को कैसे देखता है?

योगी देवताओं के बिम्ब, विमानों, ग्रहों, नक्षत्रों, तारों, भुवनों और पातालस्थ पदार्थों को समाधि से देख सकता है।

#योगी#देव दर्शन#ग्रह
लोक

काम्य श्राद्ध क्या है?

विशेष कामना की पूर्ति के लिए किया गया श्राद्ध काम्य श्राद्ध है।

#काम्य श्राद्ध#धन संतान विजय#नक्षत्र
रामचरितमानस — बालकाण्ड

श्रीरामजी के जन्म के समय कौन सा नक्षत्र/मुहूर्त था?

अभिजित् मुहूर्त — भगवान का प्रिय, दिन का सबसे शुभ मुहूर्त, मध्याह्न (दोपहर) के समय। 'सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता' — न सर्दी न गर्मी, सब लोकों को शान्ति देने वाला पवित्र काल।

#बालकाण्ड#अभिजित मुहूर्त#राम जन्म
ज्योतिष दोष एवं उपाय

मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए कौन सी पूजा

27वें दिन मूल शांति पूजा (पंडित), गणेश पूजा, नवग्रह हवन, महामृत्युंजय, दान। मूल = अशुभ नहीं, शक्तिशाली। कई महान व्यक्ति मूल जन्मे। अत्यधिक भय अनुचित — शांति पूजा कराएं।

#मूल#नक्षत्र#जन्म
पंचांग एवं कैलेंडर

नक्षत्र अनुसार शुभ कार्य कैसे तय करें

27 नक्षत्र = शुभ/अशुभ। विवाह: रोहिणी, मृगशिरा, स्वाति, अनुराधा। खरीदारी: पुष्य सर्वोत्तम। यात्रा: अश्विनी, पुष्य, रेवती। पंचांग/ऐप = सरलतम — आज का नक्षत्र+शुभ/अशुभ दिखता है।

#नक्षत्र#शुभ कार्य#मुहूर्त
मुहूर्त

रवि पुष्य नक्षत्र योग में क्या खरीदें

रविवार+पुष्य नक्षत्र = सोना/आभूषण (सबसे प्रचलित), संपत्ति, वाहन, रत्न, व्यापार सामग्री। ~1-2 बार/माह। पुष्य=सबसे शुभ खरीदारी नक्षत्र + रवि=सूर्य तेज।

#रवि पुष्य#नक्षत्र#खरीदारी
संस्कार विधि

नामकरण संस्कार में नाम रखने के शास्त्रीय नियम क्या हैं?

नामकरण नियम: जन्म नक्षत्र अक्षर, ब्राह्मण=शर्मा/क्षत्रिय=वर्मा/वैश्य=गुप्त (मनुस्मृति), सम अक्षर (2,4) शुभ, देवता/शुभ अर्थ, सरल उच्चारण, गोपनीय+लौकिक दो नाम। पिता कान में बोले → शहद से 'ॐ' लिखें।

#नामकरण#संस्कार#नाम
मुहूर्त एवं योग

गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

#गुरु पुष्य#नक्षत्र#खरीदारी
मुहूर्त एवं योग

रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

#रवि पुष्य#नक्षत्र#शुभ योग
मंत्र जप ज्ञान

जन्म नक्षत्र के अनुसार मंत्र का चयन कैसे करें?

27 नक्षत्र = 27 देवता। जन्म नक्षत्र → नक्षत्र देवता → मंत्र। आर्द्रा=रुद्र='ॐ नमः शिवाय', स्वाति=वायु=हनुमान। ज्योतिषी/गुरु से कुंडली→इष्ट→मंत्र। ज्योतिष आधारित।

#नक्षत्र#जन्म#मंत्र
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तरी
सभी प्रश्न देखें

10,000+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — श्रेणी, हब और टैग में सजे।

टैग खोज
अन्य टैग देखें

पूजा, मंत्र, साधना, उपाय, ज्योतिष — विषय अनुसार छाँटे गए सभी टैग।