विस्तृत उत्तर
रवि पुष्य योग = रविवार + पुष्य नक्षत्र। यह अत्यन्त दुर्लभ और शुभ योग है।
महत्व
- ▸पुष्य नक्षत्र सभी 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना गया है — 'पुष्यो देवगुरु बली'।
- ▸रविवार = सूर्य का दिन (ग्रहों के राजा)।
- ▸दोनों का संयोग = सर्वसिद्धिकर, सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।
पूजा का महत्व
- 1इस दिन की गई पूजा का फल अनन्त गुना।
- 2नवग्रह शान्ति पूजा अत्यन्त फलदायी।
- 3लक्ष्मी-नारायण पूजा — धन प्राप्ति।
- 4सूर्य पूजा — तेज, आरोग्य, मान-सम्मान।
- 5मंत्र दीक्षा/अनुष्ठान आरम्भ।
अन्य शुभ कार्य
- ▸स्वर्ण/आभूषण/रत्न खरीद।
- ▸नया व्यापार/उद्यम आरम्भ।
- ▸गृह प्रवेश, वाहन खरीद।
- ▸नई औषधि आरम्भ।
कितना दुर्लभ
वर्ष में केवल कुछ बार ही रवि पुष्य योग बनता है — अतः इसे अत्यन्त मूल्यवान मुहूर्त माना जाता है। कोई भी मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं — स्वयं सिद्ध शुभ।





