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मुहूर्त एवं योग📜 मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र1 मिनट पठन

रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

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विस्तृत उत्तर

रवि पुष्य योग = रविवार + पुष्य नक्षत्र। यह अत्यन्त दुर्लभ और शुभ योग है।

महत्व

  • पुष्य नक्षत्र सभी 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ माना गया है — 'पुष्यो देवगुरु बली'।
  • रविवार = सूर्य का दिन (ग्रहों के राजा)।
  • दोनों का संयोग = सर्वसिद्धिकर, सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त।

पूजा का महत्व

  1. 1इस दिन की गई पूजा का फल अनन्त गुना।
  2. 2नवग्रह शान्ति पूजा अत्यन्त फलदायी।
  3. 3लक्ष्मी-नारायण पूजा — धन प्राप्ति।
  4. 4सूर्य पूजा — तेज, आरोग्य, मान-सम्मान।
  5. 5मंत्र दीक्षा/अनुष्ठान आरम्भ।

अन्य शुभ कार्य

  • स्वर्ण/आभूषण/रत्न खरीद।
  • नया व्यापार/उद्यम आरम्भ।
  • गृह प्रवेश, वाहन खरीद।
  • नई औषधि आरम्भ।

कितना दुर्लभ

वर्ष में केवल कुछ बार ही रवि पुष्य योग बनता है — अतः इसे अत्यन्त मूल्यवान मुहूर्त माना जाता है। कोई भी मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं — स्वयं सिद्ध शुभ।

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शास्त्रीय स्रोत
मुहूर्त चिन्तामणि, ज्योतिष शास्त्र
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