विस्तृत उत्तर
हर्षण योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में चतुर्दश योग है। यह हर्ष, आनंद और उत्साह का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'हर्षण' = हर्ष देने वाला, आनंददायक। यह योग खुशी, उत्सव और सकारात्मकता का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 173°20' से 186°40' के बीच होते हैं, तब हर्षण योग होता है।
स्वामी देवता — सर्प (वासुकि)।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। उत्सव, आनंद कार्यक्रम, समारोह, विवाह और नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति प्रसन्नचित्त, सकारात्मक और उत्साही होते हैं। इनके साथ रहने से दूसरों को भी खुशी मिलती है। ये मिलनसार, वाक्पटु और सामाजिक जीवन में सफल होते हैं। इन्हें शुभ कार्यों में सहयोग और लाभ मिलता है।
मुहूर्त में प्रयोग — उत्सव, समारोह, विवाह, मनोरंजन कार्यक्रम और नई योजनाओं के लिए अत्यंत उपयुक्त।





