विस्तृत उत्तर
शिव योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में विंश (20वाँ) योग है। यह अत्यंत शुभ, मंगलकारी और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोत्तम योगों में एक है।
नाम का अर्थ — 'शिव' = मंगलकारी, कल्याणकारी। यह योग भगवान शिव के समान कल्याणकारी, पावन और मोक्षदायक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 253°20' से 266°40' के बीच होते हैं, तब शिव योग होता है।
स्वामी देवता — भगवान शिव (पशुपति)।
शुभाशुभ फल — यह अत्यंत शुभ योग है। इस योग में आरंभ किए गए सभी कार्य शुभ फल देते हैं। धार्मिक अनुष्ठान, साधना, व्रत, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए यह योग विशेष रूप से उत्कृष्ट है।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति धार्मिक स्थलों की यात्रा प्रिय करते हैं। पवित्रता का पालन करते हैं। लोक सेवा का भाव इनके मन में सदैव विद्यमान रहता है। भौतिक इच्छाओं से दूर रहकर पवित्र हृदय और मानवतापूर्ण व्यवहार इनका प्रथम लक्ष्य होता है। ईश्वर के प्रति अपार आस्था रखते हैं। समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। जीवन के उत्तरार्ध में संन्यास ग्रहण कर संत-जीवन जी सकते हैं।
मुहूर्त में प्रयोग — शिव पूजन, महारुद्राभिषेक, दीक्षा ग्रहण, गुरु-दर्शन, आध्यात्मिक अनुष्ठान, मंदिर दर्शन, तीर्थयात्रा और जपानुष्ठान के लिए यह योग सर्वोत्तम है।
विशेष महत्व — सोमवार को शिव योग का संयोग हो तो यह अत्यंत दुर्लभ और महाशुभ माना जाता है। इस दिन शिव-पूजन का फल कई गुना होता है।





