विस्तृत उत्तर
साध्य योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में द्वाविंश (22वाँ) योग है। यह साधना, संयम और क्रमिक उपलब्धि का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'साध्य' = जिसे साधा जा सके, साधने योग्य। यह योग लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सतत प्रयास और साधना का बोधक है।
गणना विधि — सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों का योगफल जब 280° से 293°20' के बीच होता है, तब साध्य योग होता है।
स्वामी देवता — विश्वदेव।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में आरंभ किए गए कार्य धीरे-धीरे और सुव्यवस्थित ढंग से पूर्ण होते हैं। एकाएक नहीं, अपितु सतत प्रयास से फल मिलता है।
जन्म-फल — साध्य योग में जन्मे व्यक्ति साधनाशील, परिश्रमी और लक्ष्य के प्रति एकाग्र होते हैं। ये जल्दबाजी में विश्वास नहीं रखते — धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से अपने लक्ष्य तक पहुँचते हैं। इनका स्वभाव सरल, मृदु और सत्यनिष्ठ होता है। इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा क्रमशः बढ़ती है। आध्यात्मिक साधना में विशेष रुचि होती है।
स्वास्थ्य — स्वास्थ्य अच्छा रहता है, लेकिन इन्हें जल्दबाजी और तनाव से बचना चाहिए।
करियर — शिक्षण, शोध, साहित्य, योग और दर्शन के क्षेत्रों में विशेष सफलता मिलती है।
मुहूर्त में प्रयोग — दीर्घकालीन योजनाएँ, शिक्षा प्रारंभ, साधना शुरू करने और क्रमिक विकास की आवश्यकता वाले कार्यों के लिए उत्तम।





