विस्तृत उत्तर
शुभ योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में त्रयोविंश (23वाँ) योग है। यह शुभता, सत्यनिष्ठा और पवित्रता का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'शुभ' = मंगलकारी, पवित्र। यह योग सत्य, धर्म और शुभ संकल्पों का बोधक है।
गणना विधि — सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों का योगफल जब 293°20' से 306°40' के बीच होता है, तब शुभ योग होता है।
स्वामी देवता — लक्ष्मी।
शुभाशुभ फल — यह अत्यंत शुभ योग है। इस योग में आरंभ किए गए कार्यों में पवित्रता और मंगल रहता है। धार्मिक कार्य, दान, विवाह और गृह प्रवेश के लिए विशेष रूप से उत्तम।
जन्म-फल — शुभ योग में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी, गुणी और मृदुभाषी होते हैं। ये स्वभाव से धर्मपरायण और नैतिक होते हैं। इनका मन शुद्ध और विचार पवित्र होते हैं। समाज में इन्हें आदर्श व्यक्ति माना जाता है। इनकी वाणी में मधुरता और प्रेम होता है। लक्ष्मी की कृपा से धन-संपत्ति की कमी नहीं होती।
स्वास्थ्य — स्वास्थ्य सामान्यतः अच्छा रहता है। मन प्रसन्न और स्वस्थ रहता है।
करियर — शिक्षण, धर्म प्रचार, चिकित्सा और समाज-सेवा में विशेष सफलता मिलती है।
मुहूर्त में प्रयोग — दान, धार्मिक अनुष्ठान, विवाह, नामकरण, विद्यारंभ और गृह प्रवेश के लिए सर्वोत्तम।





