विस्तृत उत्तर
गण्ड योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में दशम योग है। यह 9 अशुभ योगों में से एक है।
नाम का अर्थ — 'गण्ड' = ग्रंथि, अटकन या गले का भाग। यह योग जीवन में अवरोध और ग्रंथियों का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 120° से 133°20' के बीच होते हैं, तब गण्ड योग होता है।
स्वामी देवता — अग्नि।
शुभाशुभ फल — यह अशुभ योग है। इस योग में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, व्यापार आरंभ, विवाह और यात्रा नहीं करनी चाहिए। आज की ज्योतिष परंपरा में इस योग में बड़े निवेश और लंबी अवधि के अनुबंध से भी बचने की सलाह दी जाती है।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति मेधावी, परिश्रमी और दृढ़ संकल्पी होते हैं। जीवन में संघर्ष अधिक होता है किंतु अंत में सफलता मिलती है। इनमें प्रशासनिक क्षमता होती है।
शांति उपाय — अग्नि होत्र, सूर्य पूजा और गणेश उपासना से इस योग के दोष कम होते हैं।





