विस्तृत उत्तर
ध्रुव योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में द्वादश योग है। यह स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'ध्रुव' = ध्रुव तारे के समान अटल और स्थिर। यह योग अटल, स्थिर और शाश्वत कार्यों का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 146°40' से 160° के बीच होते हैं, तब ध्रुव योग होता है।
स्वामी देवता — पृथ्वी (भूमि देवी)।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इसे 'पृथ्वी तत्व का योग' माना जाता है। दीर्घकालीन निवेश, भूमि-संपत्ति कार्य, नींव रखने और स्थायी संरचनाओं के लिए सर्वोत्तम।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति दृढ़निश्चयी, स्थिर स्वभाव और संयमी होते हैं। ये एक बार जो ठान लें वह करके रहते हैं। भूमि, संपत्ति और स्थायी संसाधनों से लाभ होता है। इनका जीवन ध्रुव तारे की भांति केंद्रित और सुस्थिर होता है।
मुहूर्त में प्रयोग — दीर्घकालीन निवेश, गृह निर्माण की नींव, कृषि कार्य और स्थायी अनुबंध के लिए उत्कृष्ट।





