विस्तृत उत्तर
वृद्धि योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में एकादश योग है। यह विकास और वृद्धि का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'वृद्धि' = वृद्धि, विकास, बढ़ोतरी। यह योग सभी क्षेत्रों में उन्नति का द्योतक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 133°20' से 146°40' के बीच होते हैं, तब वृद्धि योग होता है।
स्वामी देवता — सूर्य।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। व्यापार, शिक्षा, निवेश और नई योजनाओं के लिए अत्यंत उपयुक्त।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति उन्नतिशील, महत्वाकांक्षी और जीवन में निरंतर प्रगति करने वाले होते हैं। इनका व्यापार और कारोबार बढ़ता रहता है। शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। परिवार और समाज में इनका प्रभाव बढ़ता है।
मुहूर्त में प्रयोग — व्यापार आरंभ, निवेश, शिक्षा प्रारंभ, गृह निर्माण और पदोन्नति के लिए उत्तम।





