विस्तृत उत्तर
सौभाग्य योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में चतुर्थ योग है। यह सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'सौभाग्य' = उत्तम भाग्य। यह योग जीवन में भाग्योदय और परोपकार का द्योतक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 40° से 53°20' के बीच होते हैं, तब सौभाग्य योग होता है।
स्वामी देवता — ब्रह्मा।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में किए गए कार्यों में भाग्य का विशेष सहयोग रहता है।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति भाग्यशाली, उन्नति करने वाले, शौकीन और लोगों में घुलने-मिलने में माहिर होते हैं। ये परोपकारी स्वभाव के होते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखी होता है। ये समाज में मान-सम्मान पाते हैं।
मुहूर्त में प्रयोग — विवाह, गृह प्रवेश, नई नौकरी और व्यापार आरंभ के लिए यह योग अत्यंत शुभ है।





