विस्तृत उत्तर
शोभन योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में पंचम योग है। यह सौंदर्य और कलाप्रियता का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'शोभन' = सुंदर, शोभायमान। यह योग आकर्षण और गुणों का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 53°20' से 66°40' के बीच होते हैं, तब शोभन योग होता है।
स्वामी देवता — बृहस्पति (गुरु)।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। यात्रा के लिए इसे सर्वोत्तम माना गया है। विवाह, कलात्मक कार्य और शुभ आरंभ के लिए उत्तम।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्तियों में विपरीत लिंग को आकर्षित करने की अद्भुत शक्ति होती है। ये चतुर, गुणवान और विलासी होते हैं। कार्य के प्रति बहुत समर्पित होते हैं। यदि काम-वासना को नियंत्रित कर लें तो जीवन में बहुत तरक्की करते हैं। कला, संगीत और साहित्य में विशेष रुचि होती है।
मुहूर्त में प्रयोग — यात्रा, विवाह और नए कलात्मक कार्य शुरू करने के लिए उत्कृष्ट।





