विस्तृत उत्तर
प्रीति योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में द्वितीय योग है। यह अत्यंत शुभ और प्रेम-प्रदायक माना जाता है।
नाम का अर्थ — 'प्रीति' का अर्थ है प्रेम, लगाव और मित्रता। यह योग प्रेम, सौहार्द और मधुर संबंधों का प्रतीक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 13°20' से 26°40' के बीच होते हैं, तब प्रीति योग होता है।
स्वामी देवता — भगवान विष्णु।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में विवाह, मित्रता स्थापन, व्यापार आरंभ, यात्रा और अन्य मांगलिक कार्य शुभ फल देते हैं।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति प्रेमपूर्ण और मिलनसार स्वभाव के होते हैं। ये वाणी में मधुर, तार्किक और चतुर होते हैं। वकालत, राजनीति और कूटनीति में सफल होते हैं। आभूषण, रत्न और जमीन-जायदाद से विशेष लाभ होता है। आर्थिक रूप से समृद्ध होते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखी होता है।
मुहूर्त में प्रयोग — विवाह, मित्रता, साझेदारी, संधि और नया व्यापार शुरू करने के लिए यह योग अत्यंत अनुकूल है।





