विस्तृत उत्तर
व्याघात योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में त्रयोदश योग है। यह 9 अशुभ योगों में से एक है।
नाम का अर्थ — 'व्याघात' = व्यवधान, विघ्न, आघात। यह योग हर कार्य में बाधा और अवरोध का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 160° से 173°20' के बीच होते हैं, तब व्याघात योग होता है।
स्वामी देवता — वायु।
शुभाशुभ फल — यह अशुभ योग है। वायु-तत्व का यह योग अस्थिरता का प्रतीक है। इस योग में लंबी अवधि के निवेश, विवाह, व्यापार और यात्रा वर्जित हैं।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति साहसी और मेधावी होते हैं किंतु जीवन में बाधाएं अधिक आती हैं। ये प्रयासशील होते हैं परंतु कार्य-सिद्धि में विलंब होता है। इन्हें धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए।
शांति उपाय — वायु देव की पूजा, हनुमान स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र जाप उपयोगी है।





