विस्तृत उत्तर
धृति योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में अष्टम योग है। यह धैर्य, स्थिरता और संपन्नता का प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'धृति' = धैर्य, दृढ़ता और स्थिरता। यह योग मन की स्थिरता और दृढ़ संकल्प का बोधक है।
गणना विधि — जब सूर्य और चंद्र के संयुक्त भोगांश 93°20' से 106°40' के बीच होते हैं, तब धृति योग होता है।
स्वामी देवता — जल (वरुण/जलदेवता)।
शुभाशुभ फल — यह शुभ योग है। इस योग में किए गए कार्य दीर्घकालिक फल देते हैं।
जन्म-फल — इस योग में जन्मे व्यक्ति धैर्यशाली, संयमी और दृढ़ निश्चयी होते हैं। ये विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं। व्यापार में लंबे समय के लिए सोचते हैं और सफल होते हैं। इनका पारिवारिक जीवन स्थिर और संतोषजनक होता है।
मुहूर्त में प्रयोग — दीर्घकालीन निवेश, कृषि कार्य, निर्माण कार्य और गृह प्रवेश के लिए उत्तम।





