विस्तृत उत्तर
ब्रह्म योग पंचांग के 27 नित्ययोगों में पंचविंश (25वाँ) योग है। यह विद्या, ज्ञान और ब्रह्मतत्व का सर्वोच्च प्रतीक है।
नाम का अर्थ — 'ब्रह्म' = परब्रह्म, सृष्टिकर्ता। यह योग सर्वोच्च ज्ञान, विद्या और सत्य का बोधक है।
गणना विधि — सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों का योगफल जब 320° से 333°20' के बीच होता है, तब ब्रह्म योग होता है।
स्वामी देवता — ब्रह्मा।
शुभाशुभ फल — यह अत्यंत शुभ योग है। इस योग में वेद-शास्त्र का अध्ययन, ब्रह्म-विचार, गुप्त ज्ञान की प्राप्ति और विद्या-संबंधी कार्य विशेष रूप से फलदायी होते हैं।
जन्म-फल — ब्रह्म योग में जन्मे व्यक्ति अत्यंत विद्वान, गोपनीय बातों के ज्ञाता और ईमानदार होते हैं। ये गुह्य विद्याओं में निपुण होते हैं। इनमें सत्य को जानने और बोलने की असाधारण क्षमता होती है। ये दार्शनिक और विचारशील स्वभाव के होते हैं। परमात्म-ज्ञान में इनकी विशेष रुचि होती है। समाज में इन्हें विद्वान के रूप में सम्मान मिलता है।
स्वास्थ्य — सामान्यतः स्वस्थ रहते हैं। मानसिक बल और एकाग्रता उत्तम होती है।
करियर — वेदाध्ययन, दर्शन, तंत्र, ज्योतिष, मनोविज्ञान और गुप्त विद्याओं में विशेष प्रवीणता।
मुहूर्त में प्रयोग — वेद-पाठारंभ, उपनयन संस्कार, ब्रह्म विद्या की दीक्षा, शास्त्र-चर्चा और गुप्त ज्ञान साधना के लिए सर्वोत्तम।





